Saturday, July 2, 2022
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दुल्लाखेड़ी शामली उत्तरप्रदेश में हुआ राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान की मूर्ति का भव्य अनावरण ।

दुल्लाखेड़ी । भारत में पिछले चार पांच सालों में इतिहास के वीरों को अपना साबित करने की होड़ सी मची हुई है। सबसे अधिक राजपूतों के वीरों को अन्य जातियां अपना बनाने में सबसे आगे हे। इसी क्रम में पहले मिहिरभोज प्रतिहार जी का नाम था, तो वर्तमान में राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान को एक जाति विशेष अपना बनाने पर तुली हे।

पृथ्वीराज चौहान मूर्ति अनावरण दुल्लाखेड़ी शामली
दुल्लाखेड़ी गांव, शामली उत्तरप्रदेश – राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान मूर्ति अनावरण

आखिर यह सब हो क्यों रहा है? इसके पीछे में भी एक कई कारण हो सकते है। किन्तु सबसे पहला और सरल कारण है कुछ हो-हल्ला करकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करना और बिना कुछ किए ही इतिहास के योद्धाओं को अपनी जाति में शामिल कर उनके गौरवशाली इतिहास को हथिया लेना ।

किन्तु इन इतिहास के लुटेरों की वजह से क्षत्रिय समाज के युवा में एकत्रित हुवे है, और सोशल मीडिया के माध्यम से सभी लोगो के सामने अपनी बात खुलकर रखने लगे है, पिछले महीने में 27 मई को भी राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती के उपलक्ष में क्षत्रिय युवाओं ने ट्विटर ट्रेंड करवाकर हल्ला बोला था ।

पृथ्वीराज चौहान ट्विटर ट्रेंड
27 मई 2022 राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान Twitter Trend

इसी कड़ी में आज एक और कदम बढ़ते हुवे दुल्लाखेड़ी गांव, शामली उत्तरप्रदेश के युवाओं ने राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी की मूर्ति का भव्य अनावरण किया हैं । इस मूर्ति के अनावरण को लेकर भी गुज्जर समुदाय ने आपत्ति उठाई थी की मूर्ति के शिलालेख पर राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान ना लिखा जाए वरना आंदोलन होगा ।

एक बात समझ में नहीं आती की क्या सूरज को प्रमाण देने होंगे की वही समस्त विश्व को प्रकाशित करने वाला सूर्य हे, तो जब सर्वविदित है की राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी ने अग्निवंशी चौहान क्षत्रिय वंश में जन्म लिया हे, तो फिर बिना बात का हो-हल्ला करने उनको गुज्जर बताने से कुछ साबित थोड़े हो जायेगा ।

ऊपर वीडियो में राजपूत युवाओं का जोश देखते ही बन रहा है। वर्तमान में समाज के लोगो को जाग्रत होने की बहुत आवश्यकता है नहीं तो क्षत्रिय वीर महापुरुषों के पराक्रम और बलिदान के साथ हम न्याय नही कर पाएंगे ।

एक स्थानवाचक शब्द गुर्जर को पकड़कर कुछ लोग राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान को अपना बताने पर अड़ रहे है, जो की बड़ा हास्यास्पद है। दिल्लीपति Rajput Samrat Prithviraj Chauhan जी जन्म और कर्म दोनो से एक महान क्षत्रिय राजपूत थे और रहेंगे ।

शामली में पृथ्वीराज चौहान मूर्ति का शिलालेख
दुल्लाखेड़ी गांव, शामली उत्तरप्रदेश मूर्ति शिलालेख

सभी राजपूत युवाओं से निवेदन है की अपने वीरों और वीरांगनाओं के इतिहास को पढ़े एवम् अपने बच्चो को पढ़ाए। ताकि आने वाली पीढ़ी अपना गौरवशाली इतिहास जान सके ।

“चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण।

ता ऊपर सुल्तान हे, मत चुके चौहान।। “

Vijay Singh Chawandia
Vijay Singh Chawandiahttps://rajputvoice.com
जय माता जी की दोस्तों ! मैं Vijay Singh Chawandia, RajputVoice का Author & Founder हूँ। मैं एक पूर्णकालिक ब्लॉगर और सोसिअल मिडिया influencer हूँ। जिसे इंटरनेट से जुड़ी जानकारियाँ एवं इतिहास के विषय में जानना पसंद है। मेरी आपसे विनती है की आप लोग इसी तरह हमारा सहयोग देते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे।
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2 COMMENTS

  1. बहुत ही अच्छा लेख लिखा राठौड़ साहब आपने । समाज को अभी जाग्रत करने के लिए आप जैसे युवाओं की जरूरत हैं ।

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